Sunday, 2 September 2018

सरसी छंद.."कविता"

कविता नही है देन किसी की,याद रखो ये बात।
कवि  की  लेखन निर्मल होती,ना है  कोई जात।।

कविता है आवाज हृदय की,सृजन भाव आधार।
जो  लिखते  है हृदय भाव से,वही साहित्य कार।।

कविता  देती  नित  नव  राहें,लेखन  से उद्धार।
जन हित में नव कविता पहुँचे,करदे परोपकार।।

कविता रचना हो ऐसा सुन,सबका करें विकास।
भाईचारा  गढ़ते  जाए ,भरदे  नव उल्लास।।

कविता का सम्मान करो सब,करो साधना रोज।
घट रहा  जो  वर्तमान  में,वही सृजन का ओज।।

कविता में निस्वार्थ भावना,लेखन का आगाज।
जन-जन का उद्धार करे हम,दे समता आवाज।।

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