माँ अपनी तू कोख में,मुझे नही अब मार।
देखूँ जग यह कामना,लेनें दे अवतार।।
भ्रूण नाश तू क्यों करे,ना करना ये पाप।
जीवन तू मेरा बचा,बेटी नहिं अभिशाप।।
तेरे आँचल की कली,ना करना अपमान।
इस जग में लाना मुझे,बेटी होती शान।।
तेरी हूँ माँ अंश मैं,नारी का अवतार।
मुझको देकर के जनम,दे दे नव संसार।।
बैठी हूँ मैं कोख में,देना मुझको प्यार।
बाहर लाकर कोख से,कर मेरा उद्धार।।
मात-पिता के नाम को,रौशन करना शान ।
सबका पालन मैं करूँ, दो मुझको सम्मान।।
मुझको थोड़ा प्यार दे,दे मुझको अधिकार।
माता मुझको दे जनम,कर मेरा सत्कार।।
भ्रूण नाश ना तुम करो,आशा करे गुहार।
नारी को सम्मान दो,यह संतति आधार ।।