Thursday, 20 September 2018

आशा के दोहे सरल सहज भावों में..*भ्रूण नाश मत करो *

माँ अपनी तू कोख में,मुझे नही अब मार।
देखूँ  जग  यह  कामना,लेनें  दे  अवतार।।

भ्रूण नाश तू क्यों करे,ना करना ये पाप।
जीवन तू मेरा बचा,बेटी नहिं अभिशाप।।

तेरे आँचल की कली,ना करना अपमान।
इस जग में  लाना मुझे,बेटी  होती  शान।।

तेरी हूँ  माँ  अंश मैं,नारी  का  अवतार।
मुझको देकर के जनम,दे दे नव संसार।।

बैठी हूँ मैं कोख में,देना मुझको प्यार।
बाहर लाकर कोख से,कर मेरा उद्धार।।

मात-पिता के नाम को,रौशन करना शान ।
सबका पालन मैं करूँ, दो मुझको सम्मान।।

मुझको थोड़ा प्यार दे,दे मुझको अधिकार।
माता  मुझको  दे  जनम,कर मेरा सत्कार।।

भ्रूण नाश ना तुम करो,आशा करे गुहार।
नारी को सम्मान दो,यह संतति आधार ।।

Tuesday, 4 September 2018

सरसी छंद *शिक्षक*

सरसी छंद-श्रीमति आशा आजाद

शिक्षक

शिक्षक है अभिमान देश के ,याद रखो ये बात।
गुरु का मन निर्मल होता है,ना है कोई जात।।

शिक्षक है आवाज हृदय की,सृजन भाव आधार।
शिक्षा  देकर  जीवन  गढ़ते ,करते  है  उद्धार।।

शिक्षक  देते नित  नव राहें,विद्या  का  आधार।
देकर शिक्षा देखो हर युग ,किया सदा उपकार।।

शिक्षा से शिक्षक बन जाते,सबका करें विकास।
नेक भाव से ज्ञान है देते,गुरु ही जग की आस।।

शिक्षक का  सम्मान  करो सब,करो  साधना रोज।
गुरु के मुख से सत् ही निकले,रखें सत्य का ओज।।

शिक्षक में निस्वार्थ भावना,नित् करते आगाज।
हर जन का  उद्धार  करे ये,दे  समता  आवाज।।

Sunday, 2 September 2018

सरसी छंद.."कविता"

कविता नही है देन किसी की,याद रखो ये बात।
कवि  की  लेखन निर्मल होती,ना है  कोई जात।।

कविता है आवाज हृदय की,सृजन भाव आधार।
जो  लिखते  है हृदय भाव से,वही साहित्य कार।।

कविता  देती  नित  नव  राहें,लेखन  से उद्धार।
जन हित में नव कविता पहुँचे,करदे परोपकार।।

कविता रचना हो ऐसा सुन,सबका करें विकास।
भाईचारा  गढ़ते  जाए ,भरदे  नव उल्लास।।

कविता का सम्मान करो सब,करो साधना रोज।
घट रहा  जो  वर्तमान  में,वही सृजन का ओज।।

कविता में निस्वार्थ भावना,लेखन का आगाज।
जन-जन का उद्धार करे हम,दे समता आवाज।।