Wednesday, 20 January 2021

मुक्तक-माँ

मुक्तक-तुलसी मेरी माँ है


तुलसी मेरी माँ है प्यारी, जीवन का आधार ।

निर्मल ममता बाँट रही है, देती मुझको प्यार ।

कर्म कर्तव्य अथाह रहता, पुण्य काज का भाव ।

हृदय भाव से करती हूँ मैं, अंतस से सत्कार ।।


घर परिवार की रक्षा करती, तुलसी उसका नाम ।

भाव धरे हर क्षण सेवा का, माँ ही चारो धाम ।

जीव कोख नौ माह धरे वह, तब संभव है जन्म ।

दुग्धपान की अमृत धारा, देती उसे प्रणाम ।।


घर सुगंधित जैसै करती, तुलसी चारों ओर ।

माँ की ममता निश्छल बहती, रिश्तें रखे बटोर ।

दुख पीड़ा को हँसकर सहती, माँ जगती की शान ।

कष्ट किसी का सहा न जाता, होती भाव विभोर ।।


करुणा की है मूर्ति धरा पर, सुंदर रखती ज्ञान ।

तन पर कितनी पीड़ा सहती, देती जीवन दान ।

कर्म धर्म से मुख नहिं मोड़ा, होवें कितने भार ।

कलयुग में बस एकमात्र है, माँ दे स्नेह समान ।।