मुक्तक-तुलसी मेरी माँ है
तुलसी मेरी माँ है प्यारी, जीवन का आधार ।
निर्मल ममता बाँट रही है, देती मुझको प्यार ।
कर्म कर्तव्य अथाह रहता, पुण्य काज का भाव ।
हृदय भाव से करती हूँ मैं, अंतस से सत्कार ।।
घर परिवार की रक्षा करती, तुलसी उसका नाम ।
भाव धरे हर क्षण सेवा का, माँ ही चारो धाम ।
जीव कोख नौ माह धरे वह, तब संभव है जन्म ।
दुग्धपान की अमृत धारा, देती उसे प्रणाम ।।
घर सुगंधित जैसै करती, तुलसी चारों ओर ।
माँ की ममता निश्छल बहती, रिश्तें रखे बटोर ।
दुख पीड़ा को हँसकर सहती, माँ जगती की शान ।
कष्ट किसी का सहा न जाता, होती भाव विभोर ।।
करुणा की है मूर्ति धरा पर, सुंदर रखती ज्ञान ।
तन पर कितनी पीड़ा सहती, देती जीवन दान ।
कर्म धर्म से मुख नहिं मोड़ा, होवें कितने भार ।
कलयुग में बस एकमात्र है, माँ दे स्नेह समान ।।