दिनाँक-30.11.19
*चाह अगर सुंदर जीवन का,*
*चलो गाँव की ओर।*
*चीं चीं करके गीत सुनाती,*
*चिड़ियों का हो शोर।*
*कलकल बहती नदियाँ सुंदर,*
*सुनलों सुंदर राग।*
*हरी वादियाँ हृदय लुभाती,*
*सुंदर होली फाग।*
*कभी प्रदूषण नही घेरता,*
*उठकर देखों भोर।*
*चाह अगर सुंदर जीवन का,*
*चलो गाँव की ओर।*
*संस्कार की राह है चलते,*
*मीठे उनके बोल।*
*मेहनत से कभी हार न माने*
*देखो उनको तोल।*
*आकर्षित कर मनोभाव से,*
*मन को दे झिंझोर।*
*चाह रखें सुंदर जीवन का,*
*चलो गाँव की ओर।*
*कृषक अन्न से पेट है भरते,*
*हमपर है उपकार।*
*राह मेहनत का चुनते है,*
*सत्य कर्म आधार।*
*शुद्ध मन से बाँधते है ये,*
*रिश्तों की सब डोर।*
*चाह अगर सुंदर जीवन का,*
*चलो गाँव की ओर।*
*पशुओं की भी पूजा करते,*
*रखते उनका मान।*
*दुख पीड़ा में मिलकर रहते,*
*नेक यही इंसान।*
*हरियाली चहुँओर है फैली,*
*मन मारे हिलकोर।*
*चाह अगर सुंदर जीवन का,*
*चलो गाँव की ओर।*
रचनाकार-आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़