विष्णु पद छंद..सरल सहज भावों में
नेता का है खेल निराला,पाप बहुत करते।
लूटे देखो दीन दुखी को,बहुत माल भरथे।।
वोट माँगथे घूम गली में,हाथ जोड़ सुन ले।
नेता बनके भूल जाय सब,बाद नही सुध ले।।
रोते बच्चे भूख बहुत है,भूल जाय पल में।
नोट वोट की महिमा गाते,छले सभी छल में।
पैसै का है खेल निराला,पाप कपट करते।
दुख पीड़ा में मरते दुखियाँ,लूट जेब भरते।।
भारत की यह देख दुर्दशा,दाम खूब बढ़ते।
नेता लालच कितना करते,झूठ बोल लड़ते।।
देखो किसान की ये हालत,खेत खार उजड़े।
आत्म-हत्या कर लेते जी,कभी काज बिगड़े।।
कोई नेता सच्चा ढूँढों। बात सभी सुन लें।।
जन-जन का उद्धार करे जो,वोट सोच चुन लें।।
रचनाकार-श्रीमति आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़